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मेवाड़ का इतिहास

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By NotesMind

मेवाड़ का इतिहास राजस्थान ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की वीरता, त्याग और स्वाभिमान की सबसे महान गाथा है। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान का यह क्षेत्र सदियों तक विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध प्रतिरोध का मुख्य केंद्र रहा। गुहिल वंश की स्थापना से लेकर चित्तौड़गढ़ के प्रथम साके (1303 ई.) तक का काल मेवाड़ के उत्कर्ष की आधारशिला है।

मेवाड़ का भौगोलिक एवं प्राचीन परिचय

मेवाड़ का इतिहास समझने के लिए इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राचीन नामों को जानना आवश्यक है, जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

  • क्षेत्र: आधुनिक उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़।

  • प्राचीन नाम: मेदपाट (Pragvat), शिवी जनपद।

  • भौगोलिक रक्षक: उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वतमाला ने इसे सामरिक दृष्टि से अजेय बनाया।


गुहिल (सिसोदिया) वंश की उत्पत्ति और स्थापना

मेवाड़ पर शासन करने वाला गुहिल वंश संसार के सबसे प्राचीन जीवित राजवंशों में से एक माना जाता है।

  • आदि पुरुष (संस्थापक): राजा गुहिल (566 ई.)।

  • वंश परिचय: शिलालेखों और इतिहासकारों के अनुसार, गुहिल के पिता शिलादित्य और माता पुष्पवती थीं।

  • उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत:

    • गौरीशंकर हीराचंद ओझा: इन्हें 'सूर्यवंशी' मानते हैं।

    • डॉ. डी.आर. भंडारकर: इन्हें 'ब्राह्मण वंश' से संबंधित बताते हैं।

    • कर्नल जेम्स टॉड: इन्हें वल्लभी के शासकों से जोड़ते हैं।


मेवाड़ के प्रतापी शासक और उनका योगदान

गुहिल — वंश संस्थापक (566 ई.)

  • कर्नल टॉड के अनुसार गुहिल वल्लभी के शिलादित्य का पुत्र था; माता — पुष्पावती।

  • गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार गुहिल ने 566 ई. में मेवाड़ में शासन किया (सामोली अभिलेख के आधार पर)।

  • 1869 ई. में आगरा से गुहिल के 2000 चांदी के सिक्के प्राप्त हुए।

  • सामोली अभिलेख (646 ई.) — शिलादित्य का अभिलेख, जो गुहिल का पाँचवाँ वंशधर था (गुहिल–भोज–महेन्द्र–नाग–शीलादित्य)। यह वंश की प्राचीनतम व काल-निर्धारक प्रशस्ति है।

1. बप्पा रावल (काल: 734 ई. - वास्तविक संस्थापक)

बप्पा रावल (कालभोज) मेवाड़ के इतिहास के प्रथम महानायक थे। इन्होंने मेवाड़ राज्य को एक सुदृढ़ राजनीतिक इकाई बनाया।

  • चित्तौड़ विजय: 734 ई. में अपने गुरु हारित ऋषि के आशीर्वाद से मान मोरी को हराकर चित्तौड़ दुर्ग पर अधिकार किया। (राजप्रशस्ति)

  • राजधानी: नागदा (उदयपुर); कैलाशपुरी में एकलिंगजी (लकुलीश) मंदिर बनवाया। मेवाड़ शासक स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानते थे।

  • मुस्लिम सेना को खदेड़ते हुए गजनी (अफगानिस्तान) तक पहुँचा।

  • चिन्तामणि विनायक वैद्य ने इसकी तुलना चार्ल्स मार्टेल (यूरोप में प्रथम मुसलमान-विजेता फ्रांसीसी सेनापति) से की।

  • बापा के सैन्य ठिकाने के कारण पाकिस्तान के शहर का नाम रावलपिंडी पड़ा। उपाधियाँ — हिन्दू सूर्य, राजगुरु, चक्रकवै।

  • धार्मिक योगदान: उदयपुर के निकट एकलिंगजी मंदिर (कैलाशपुरी) का निर्माण करवाया। मेवाड़ के शासक स्वयं को 'एकलिंगजी का दीवान' मानते थे।

  • सैन्य शक्ति: इन्होंने मुस्लिम आक्रमणकारियों को खदेड़ते हुए अफगानिस्तान के गजनी तक अपना प्रभाव स्थापित किया।

2. महारावल अल्लट /आलुरावल(10वीं शताब्दी)

इतिहास में 'आलू रावल' के नाम से प्रसिद्ध अल्लट ने मेवाड़ में कई प्रशासनिक नवाचार किए।

  • दूसरी राजधानी: आहड़ को व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित कर अपनी दूसरी राजधानी बनाया।

  • नौकरशाही (Bureaucracy): मेवाड़ में पहली बार नौकरशाही की स्थापना का श्रेय अल्लट को जाता है।

  • वराह मंदिर: आहड़ में भगवान विष्णु के वराह मंदिर का निर्माण करवाया।

  • माता महालक्ष्मी राठौड़ (राष्ट्रकूट वंश); हूण राजकुमारी हरिया देवी से विवाह — हरिया देवी ने हर्षपुर गाँव बसाया।

3. जैत्रसिंह (1213–1253 ई.)

जैत्रसिंह के शासनकाल को मध्यकालीन मेवाड़ का 'स्वर्णकाल' कहा जाता है।

  • भूतला का युद्ध: दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश को पराजित किया। हालांकि, इस युद्ध में नागदा क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद जैत्रसिंह ने चित्तौड़ को नई राजधानी बनाया।

  • इल्तुतमिश की लौटती सेना ने नागदा नष्ट किया, अतः जैत्रसिंह ने चित्तौड़ (परमारों से छीनकर) को नई राजधानी बनाया।

  • डॉ. दशरथ शर्मा ने इसे मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल कहा; ओझा के अनुसार गुलाम वंश काल में मेवाड़ का सबसे प्रतापी राजा।


रतनसिंह और चित्तौड़ का प्रथम साका (1303 ई.)

रावल रतनसिंह मेवाड़ की 'रावल शाखा' के अंतिम शासक थे। इनका काल भारतीय इतिहास में रानी पद्मिनी के जौहर और अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के लिए जाना जाता है।

अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारण:

  1. विस्तारवादी नीति: अलाउद्दीन संपूर्ण भारत पर अधिकार करना चाहता था।

  2. चित्तौड़ का सामरिक महत्व: गुजरात और मालवा जाने वाले व्यापारिक मार्ग पर चित्तौड़ का नियंत्रण था।

  3. रानी पद्मिनी की सुंदरता: मलिक मोहम्मद जायसी के ग्रंथ 'पद्मावत' के अनुसार रानी पद्मिनी को पाने की लालसा।

चित्तौड़ का प्रथम साका (1303):

  • केसरिया: रतनसिंह और उनके सेनापति गोरा व बादल ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

  • जौहर: रानी पद्मिनी के नेतृत्व में 1600 वीरांगनाओं ने अग्नि में आत्मोत्सर्ग (जौहर) किया।

  • परिणाम: अलाउद्दीन का चित्तौड़ पर अधिकार हो गया और उसने इसका नाम बदलकर अपने पुत्र के नाम पर 'खिज्राबाद' रख दिया।


मेवाड़ के प्रमुख शासक: एक नज़र में (Table)

शासक महत्वपूर्ण तथ्य उपलब्धियाँ
गुहिल संस्थापक (566 ई.) गुहिल वंश की नींव रखी।
बप्पा रावल वास्तविक संस्थापक एकलिंगजी मंदिर का निर्माण, सोने के सिक्के।
अल्लट नौकरशाही के जनक आहड़ को राजधानी बनाया, वराह मंदिर।
जैत्रसिंह मध्यकालीन मेवाड़ का उत्कर्ष भूतला का युद्ध (इल्तुतमिश की पराजय)।
समरसिंह दिल्ली सल्तनत से संघर्ष तुर्कों को मेवाड़ से दूर रखा।
रतनसिंह अंतिम रावल शासक 1303 ई. का ऐतिहासिक साका और जौहर।

📌 प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

  • मेवाड़ का प्राचीन नाम क्या था? - मेदपाट और शिवी।

  • मेवाड़ में नौकरशाही की शुरुआत किसने की? - महारावल अल्लट ने।

  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बप्पा रावल ने कब अधिकार किया? - 734 ई. में।

  • रानी पद्मिनी ने जौहर कब किया? - 26 अगस्त 1303 ई. को।

  • एकलिंगजी मंदिर का निर्माण किसने करवाया? - बप्पा रावल ने।

निष्कर्ष

मेवाड़ का इतिहास केवल राजाओं की वंशावली नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के प्रति अटूट आस्था की कहानी है। गुहिल वंश से शुरू हुई यह यात्रा रतनसिंह के बलिदान तक पहुँचकर एक नए युग (सिसोदिया वंश) की ओर बढ़ती है। चित्तौड़ का पहला साका आज भी वीरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मेवाड़ का इतिहास — महत्वपूर्ण FAQs

FAQ 1. मेवाड़ के प्राचीन नाम क्या थे?
उत्तर: मेवाड़ के प्राचीन नाम मेदपाट (प्राग्वाट) और शिवि जनपद बताए गए हैं।

FAQ 2. मेवाड़ के गुहिल वंश का आदि पुरुष कौन माना जाता है?
उत्तर: राजा गुहिल को गुहिल वंश का आदि पुरुष एवं संस्थापक माना जाता है।

FAQ 3. गुहिल वंश की स्थापना कब मानी गई है?
उत्तर: दिए गए स्रोत के अनुसार गुहिल वंश की स्थापना 566 ई. में मानी गई है।

FAQ 4. गुहिलों को सूर्यवंशी किस इतिहासकार ने माना है?
उत्तर: गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने गुहिलों को सूर्यवंशी माना है।

FAQ 5. गुहिलों को ब्राह्मण वंश से संबंधित किस इतिहासकार ने माना है?
उत्तर: डॉ. डी.आर. भंडारकर ने गुहिलों को ब्राह्मण वंश से संबंधित माना है।

FAQ 6. मेवाड़ का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है?
उत्तर: बप्पा रावल (कालभोज) को मेवाड़ का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

FAQ 7. बप्पा रावल ने चित्तौड़ पर कब अधिकार किया था?
उत्तर: दिए गए स्रोत के अनुसार बप्पा रावल ने 734 ई. में मान मोरी को पराजित कर चित्तौड़ पर अधिकार किया था।

FAQ 8. बप्पा रावल की प्रथम राजधानी कौन-सी थी?
उत्तर: बप्पा रावल की प्रथम राजधानी नागदा थी।

FAQ 9. मेवाड़ के शासक स्वयं को किस देवता का दीवान मानते थे?
उत्तर: मेवाड़ के शासक स्वयं को भगवान एकलिंगजी का दीवान मानते थे।

FAQ 10. महारावल अल्लट की प्रमुख प्रशासनिक उपलब्धि क्या थी?
उत्तर: महारावल अल्लट को मेवाड़ में नौकरशाही की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है।

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